देवघर : सदर अस्पताल की कुव्यवस्था से परेशान हैं मरीज के परिजन, रिपेयरिंग के नाम पर तोड़ दिया गया शौचालय, आज तक नहीं हुआ मरम्मत

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज,...
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पीने की पानी के लिए भटकते हैं मरीजों के परिजन

देवघर। जिला में सर्वाधिक चर्चा वाला सरकारी संस्थानों में देवघर सदर अस्पताल अपने कु व्यवस्थाओं के लिए उच्चतम स्थान रखता है। कभी मरीजों से पैसे लेने की चर्चा रहती है, तो कभी पैसे लेकर किसी के मामले को जबरन ग्रीवियस बना देना भी चर्चा का मुख्य केन्द्र रहता है। अभी गर्मी के मौसम ने दस्तक भी नहीं दिया है और अस्पताल में मरीजों के परिजनों को पीने की पानी के लिए आसानी से इधर – उधर भटकते देखा जा सकता है।

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अस्पताल में वर्तमान में न शौचालय मरीजों के लिए दुरुस्त है न हीं पीनें की पानी की व्यवस्था, ऐसे में मरीज और उनके परिजन जिला प्रशासन और अस्पताल के सीएस, डीएस को कोसते नजर आते हैं। वहीं एक चापाकल भी कभी अस्पताल परिसर में हुआ करता था, उसकी भी हालत बद से बदतर है, शौचालय मरम्मती के नाम पर महीनों से तोड़ फोड़ कर छोड़ दिया गया है। आखिर मरीज के परिजन शौच आदि के लिए जाएं तो कहां जाएं? ग्रामीण क्षेत्र के मरीज किसी तरह से गाड़ी भाड़ा का पैसा इकठ्ठे कर सदर अस्पताल पहुंचते हैं और यहां पहुंचने के बाद न तो मरीज के लिए पीने की पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय दुरुस्त। जबकि अस्पताल में फण्ड की भी कमी नहीं होगी, पर शायद नियत सही नहीं रहने के कारण गरीब मरीज इस सरकारी तंत्र की कुव्यवस्था से परेशान दिखते हैं। वहीं सदर अस्पताल में एक भी चापानल नहीं है जिससे पीने के पानी के लिए मरीज के परिजन इधर उधर बोतल लेकर भटकते रहते हैं, वहीं महिलाओं के स्नान के लिए बाथरूम भी नहीं है। ऐसा नहीं है कि इन बातों की जानकारी अस्पताल के वरीय अधिकारियों को नहीं है, पर यह समझ से परे है इन सभी चीजों को ठीक क्यों नहीं किया जा रहा है।

—सुधांशु शेखर देवघर

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नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।
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