झारखण्ड के किसानों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं, सरकार के दावे कागजी: विधायक
बरही। बजट सत्र के दौरान विधानसभा में कृषि विभाग के कटौती प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने राज्य सरकार की कृषि नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि झारखण्ड की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, लेकिन सरकार की उदासीनता के कारण भूमि पुत्र आज भी बदहाली के आंसू रो रहा है।
धान अधिप्राप्ति केंद्रों की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी
विधायक ने सदन का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि हजारीबाग जिला अंतर्गत चौपारण, बरही और पदमा प्रखंड के सरकारी धान अधिप्राप्ति केंद्रों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। सरकार ने 15 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक धान खरीद का समय निर्धारित किया है, लेकिन अब तक निबंधित किसानों का मात्र 5 प्रतिशत धान ही लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी केंद्रों की सुस्ती का फायदा उठाकर बिचौलिये औने-पौने दामों पर किसानों से धान खरीद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
सिंचाई योजनाओं की बदहाली और भौगोलिक चुनौतियां
श्री यादव ने कहा कि झारखण्ड का अधिकांश भाग छोटा नागपुर पठार पर स्थित है, जहाँ खेती पूरी तरह वर्षा पर आधारित है। उन्होंने कोणार नहर (गिरिडीह), बक्शा नहर (चतरा) और लोटिया जलाशय ( हजारीबाग ) जैसी योजनाओं के खराब रख-रखाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट्स का लाभ सीमित किसानों को ही मिल पा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए चेक डैम, तालाब निर्माण और लिफ्ट इरिगेशन जैसी छोटी सिंचाई योजनाएं ही वरदान साबित हो सकती हैं।
कोल्ड स्टोरेज और मार्केटिंग का अभाव
विधायक ने भंडारण सुविधाओं की कमी पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सब्जी और फल उत्पादन की अपार संभावनाओं के बावजूद कोल्ड स्टोरेज के अभाव में फसलें बर्बाद हो रही हैं। पुराने मिनी कोल्ड स्टोरेज बंद पड़े हैं। उन्होंने मड़ुआ जैसी पारंपरिक फसलों के लिए विशेष मार्केटिंग व्यवस्था की मांग की।
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