तिसरी : तेज रफ्तार उज्ज्वल पब्लिक स्कूल की मैजिक वैन गड्ढे में पलटी, बाल-बाल बचे मासूम, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

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बाल-बाल बचे मासूम, स्कूल प्रबंधन व विभाग की लापरवाही उजागर

फिटनेस–इंश्योरेंस फेल, कथित फर्जी लाइसेंस पर उठे गंभीर सवाल

गिरिडीह तिसरी से मनोज लाल बर्नवाल

गिरिडीह/तिसरी। गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में आज सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। तिसरी थाना क्षेत्र अंतर्गत गांधी मैदान के समीप नवनिर्मित पीसीसी सड़क के किनारे गड्ढे में उज्ज्वल पब्लिक स्कूल की तेज रफ्तार मैजिक वैन (JH10BT3853) अनियंत्रित होकर पलट गई। वैन में सवार स्कूली बच्चे बाल-बाल बच गए, हालांकि तीन बच्चों को चोटें आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, स्कूल वैन रोज की तरह बुटवरिया गांव से 10–12 बच्चों को लेकर तेज रफ्तार में स्कूल जा रही थी। जैसे ही वाहन पीसीसी सड़क के मोड़ पर पहुंचा, चालक संतुलन खो बैठा और वैन सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।

हादसे में 12 वर्षीय मुस्कान कुमारी, 8 वर्षीय बिपिन सिंह और 10 वर्षीय मरिता बेसरा घायल हो गए। तीनों बच्चों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिसरी लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

परिजनों का आरोप है कि स्कूल वैन चालक को पहले भी तेज गति से वाहन चलाने को लेकर चेतावनी दी गई थी, बावजूद इसके लापरवाही बरती जाती रही। वहीं ग्रामीणों ने सड़क किनारे गड्ढे नहीं भरे जाने को भी हादसे की बड़ी वजह बताया। साथ ही, चालक के अप्रशिक्षित होने और कथित तौर पर फर्जी अथवा वैध लाइसेंस नहीं होने की बात भी सामने आई है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

चौंकाने वाली बात यह है कि एम-परिवहन पोर्टल पर वाहन की जानकारी खंगालने पर सामने आया कि उक्त स्कूल वैन का फिटनेस 28 मार्च 2021 तक ही वैध था, जबकि बीमा (इंश्योरेंस) 25 मार्च 2020 को ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद बच्चों की जान को जोखिम में डालकर वाहन का संचालन किया जा रहा था। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में आज के लिए स्कूल बंद कर दिया।

गौरतलब है कि उज्ज्वल पब्लिक स्कूल पूर्व में भी विवादों में रहा है। इससे पहले स्कूल के एक शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ मारपीट की घटना सामने आ चुकी है, जिसे मीडिया में प्रमुखता से उठाया गया था। उस मामले में उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए जांच टीम का गठन कर जांच भी कराई थी।

एक बार फिर इस हादसे ने निजी स्कूलों की मनमानी, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है या यह हादसा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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