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एम्स देवघर में मरीजों के नाश्ते में कीड़ा, मामला पहुंचा सांसद और पीएम तक

On: January 23, 2026 1:30 AM
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देवघर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करने वाले एम्स देवघर में एक बार फिर बेहद शर्मनाक लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की कैंटीन द्वारा मरीजों को परोसे गए नाश्ते में कीड़ा मिलने का मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर सांसद और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है। यह मामला एम्स देवघर के ऑर्थोपेडिक विभाग से जुड़ा है, जहां बांका जिला के चांदन प्रखंड अंतर्गत कुसुम जोरी गांव निवासी रिंकी कुमारी (उम्र 29 वर्ष), पति सुदर्शन वर्मा, पिता उमाकांत पोद्दार, विगत 9 अगस्त 2025 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भर्ती हैं।मरीज का सीआर नंबर 209262500786522 है। वर्तमान में वह आईपीडी वार्ड के बेड संख्या 16 पर पिछले 16 दिनों से भर्ती हैं और आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाजरत हैं। मरीज का प्राथमिक उपचार एम्स के ऑर्थो चिकित्सक डॉ. विकास राज द्वारा किया जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार, 22 जनवरी की सुबह एम्स कैंटीन द्वारा मरीजों को दिया गया नाश्ता—जिसमें सूजी, एक अंडा और लगभग 100 ग्राम दूध शामिल था—पूरी तरह कीड़ा युक्त पाया गया। जैसे ही भोजन में कीड़ा दिखा, मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज के पिता उमाकांत पोद्दार ने न केवल एम्स के सुपरिंटेंडेंट को लिखित शिकायत दी, बल्कि गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी कीड़ा युक्त भोजन की तस्वीर साझा कर उच्चस्तरीय जांच की अपील की है। गौर करने वाली बात यह है कि शिकायतकर्ता उमाकांत पोद्दार स्वयं बिहार के बांका जिले के चांदन प्रखंड से एक सक्रिय न्यूज़ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल उनकी बेटी के लिए नहीं, बल्कि एम्स में भर्ती हर उस मरीज के लिए है जो इलाज के साथ-साथ सुरक्षित और स्वच्छ भोजन पाने का हकदार है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस संस्थान को गरीब और जरूरतमंद मरीजों को 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कैशलेस इलाज देने के लिए बनाया गया, वहीं यदि मरीजों को कीड़ा युक्त भोजन दिया जाएगा, तो एम्स प्रबंधन की जवाबदेही आखिर किस स्तर पर तय होगी?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एम्स देवघर प्रशासन इस गंभीर मामले में सिर्फ औपचारिकता निभाएगा या फिर दोषी कैंटीन संचालकों पर सख्त और उदाहरणीय कार्रवाई करेगा।

—सुधांशु शेखर देवघर

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