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सड़कें नहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, सर्पदंश से एक युवक की दर्दनाक मौत

On: January 19, 2026 7:48 PM
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सड़कें नहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, सर्पदंश से एक युवक की दर्दनाक मौत

झारखंड के एक गांव में एक और की गई जान, आखिर जिम्मेदार कौन?

विष्णुगढ़। प्रखंड अंतर्गत चितरामो के गिधनिया गांव में सर्पदंश से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। सर्पदंश से मरने वाले युवक की पहचान मनोज कुमार टुडू, पिता महादेव टुडू के रूप में हुई है। मृतक मनोज कुमार टुडू दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता था। गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी मनोज की जान ले ली। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली की भी एक सच्ची तस्वीर है। सर्पदंश से हुए युवक की मौत के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि बीती रात करीब एक बजे मनोज कुमार टुडू जमीन पर हीं सो रहे थे। उनके पास चारपाई नहीं थी। उसी दौरान एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। जब तक उनके परिजन कुछ समझ पाते और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था करते तब तक मनोज की स्थिति बिगड़ चुकी थी। उनके परिजन आनन-फानन में उन्हें विष्णुगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की कोशिश करते लेकिन गांव से बाहर निकलने का कोई पक्का रास्ता नहीं रहने के कारण काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने के पहले हीं उनकी मौत हो गई। जब परिजन किसी तरह उन्हें विष्णुगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए तब चिकित्सकों ने जांच कर बताया कि युवक की मौत हो चुकी है। अगर समय रहते मनोज का ईलाज किया जाता तो शायद उनकी मौत नहीं होती। पच्चीस साल में भी नहीं बनी हैं सड़क, गांव तक पहुंचना आज भी आसान नहीं। चितरामो गिधनिया गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी उनके गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। कहा कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बीच में एक नदी होने के कारण बरसात में नदी में पानी के तेज बहाव के कारण आना जाना काफी मुश्किल हो जाता है।

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उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए या फिर किसी भी तरह की कोई दुर्घटना हो जाए तो उन्हें अस्पताल पहुंचाना एक असंभव कार्य हो जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारें आईं, घोषणाएं हुई , सरकारी अधिकारी सर्वे करने आए और चले गए। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कुछ भी नहीं बदला है, हालात जस के तस बने हुए हैं। गांव में न बिजली है और न ही पानी वहीं विकास सिर्फ कागजों तक सीमित है। यह गांव आज भी एक्कीसवी सदी एवं डिजिटल इंडिया से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने कहा कि बिजली कभी कभार आती है, पीने के लिए पानी की सुविधा नहीं है और सड़कें जैसे सपने बन गए हैं। वहीं मनरेगा जैसी योजनाएं केवल पोस्टरों और विज्ञापन मात्र तक सीमित रह गई है। सर्पदंश से भरे युवक मनोज कुमार टुडू के पिता महादेव टुडू ने रोते हुए कहा कि अगर समय रहते हम अपने बेटे को अस्पताल तक पहुंचा पाते तो शायद आज हमारा बेटा जिंदा रहता।

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महादेव टुडू ने कहा कि हम गरीब लोग हैं, हमारे घर में चारपाई तक नहीं है। सड़कें नहीं हैं, पानी नहीं है , बिजली नहीं है , तो फिर कैसी आज़ादी है हमारे लिए? इस प्रकार की घटना ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हम लोग वर्षों से विकास की मांग करते आ रहे हैं। अधिकारियों ने सिर्फ सर्वे का काम किया, तस्वीरें खिंचवाई ,वादे किए और चले गए। लेकिन सच्चाई यह है कि आज तक एक ईंट तक नहीं रखी गई है। क्या सड़कों के अभाव में किसी की भी मौत हो जाना लोकतंत्र की असफलता नहीं है? क्या हर गांव तक सड़क, पानी, बिजली पहुंचाना सरकार का संवैधानिक दायित्व नहीं है। क्या सबका साथ, सबका विकास, सिर्फ एक नारा बन कर रह गया है। मनोज कुमार टुडू की मौत कोई एक ऐसी अकेली घटना नहीं है। बल्कि यह हर उस गांव की कहानी है जहां आज भी सरकारी उपेक्षा के कारण लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। अगर इन बुनियादी सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में ऐसी कई जानें जाते रहेगी, इसका जिम्मेदार कोई और नहीं होगा बल्कि व्यवस्था खुद होगी।

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Nitish Keshri

नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।

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