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गुरु पूर्णिमा आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

On: January 19, 2026 10:55 PM
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गुरु पूर्णिमा आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

गुरु को भगवान से भी ऊंचा माना जाता है क्योंकि वह हमें इस संसार में जीने का रास्ता और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का रास्ता बताते हैं। आषाढ़ की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा करता है और अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा, फूल, वस्त्र आदि भेंट करता है। इस दिन शिष्य अपने सारे अवगुण गुरु को समर्पित कर देता है और अपना सारा भार गुरु को सौंप देता है। इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व 03 जुलाई, सोमवार यानी आज पड़ रहा है।

➨गुरु पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Guru Purnima 2023 Shubh Muhurat)

गुरु पूर्णिमा की तिथि- 03 जुलाई 2023, सोमवार यानी आज
गुरु पूर्णिमा आरंभ- 02 जुलाई, रात्रि 08 बजकर 21 मिनट से
गुरु पूर्णिमा समापन- 03 जुलाई, शाम 05:08 बजे

➨शुभ योग

इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन कई शुभ योग बनने जा रहे हैं। इस दिन ब्रह्म योग और इंद्र योग बनेगा. वहीं सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग भी बनने जा रहा है। ब्रह्म योग 02 जुलाई यानी कल शाम 07:26 बजे से 03 जुलाई यानी आज दोपहर 03:45 बजे तक रहेगा. इंद्र योग 03 जुलाई यानी आज दोपहर 03 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगा और यह कल 04 जुलाई को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगा.

➨गुरु पूर्णिमा पूजन विधि (Guru Purnima 2023 Pujan Vidhi)

इस दिन सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करने के बाद स्नान करें और फिर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें और किसी साफ स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाकर व्यास पीठ का निर्माण करें। इसके बाद उस पर गुरु व्यास की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें रोली, चंदन, फूल, फल और प्रसाद चढ़ाएं। गुरु व्यास के साथ शुक्रदेव और शंकराचार्य आदि गुरुओं का आह्वान करें और “गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजनं करिष्ये” मंत्र का जाप करें।

➨गुरु पूर्णिमा 2023 महत्व (Guru Purnima 2023 Significance)

मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। सनातन धर्म में महर्षि वेद व्यास को प्रथम गुरु का दर्जा प्राप्त है क्योंकि उन्होंने सबसे पहले मानव जाति को वेदों की शिक्षा दी थी। इसके अलावा महर्षि वेद व्यास को श्रीमद्भागवत, महाभारत, ब्रह्मसूत्र, मीमांसा के अलावा 18 पुराणों का रचयिता माना जाता है। यही कारण है कि महर्षि वेद व्यास को आदि गुरु का दर्जा प्राप्त है। गुरु पूर्णिमा के दिन महर्षि वेदव्यास की विशेष पूजा की जाती है।

Nitish Keshri

नितिश केशरी झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण निवासी हैं। वे पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मनोरंजन के साथ-साथ राजनीति, समाज, शिक्षा और समसामयिक विषयों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं। उनकी लेखन शैली सटीक जानकारी और सरल भाषा के लिए जानी जाती है।

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